“तत्काल” पर दलालों का राज! राउरकेला स्टेशन बना भ्रष्टाचार का अड्डा, सिस्टम पूरी तरह फेल
- RailMantra Bureau

- Mar 20
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आरपीएफ नहीं करती कार्रवाई, कमर्शियल विभाग देती है सूचना: सीनियर डीसीएम
चक्रधरपुर: अगर आप चक्रधरपुर रेल मंडल के राउरकेला रेलवे स्टेशन से ‘तत्काल’ टिकट लेने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए—क्योंकि यहां अब टिकट नहीं, बल्कि सिस्टम बिकता है! चक्रधरपुर रेल मंडल के इस प्रमुख स्टेशन पर दलालों का ऐसा कब्जा है कि आम यात्री पूरी तरह बेबस हो चुका है।
हकीकत यह है कि यहां ‘तत्काल’ टिकट अब जरूरतमंदों को नहीं, बल्कि पैसे वालों को मिलता है—वो भी दलालों के जरिए। आरोप है कि यह पूरा खेल रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और कमर्शियल विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
सब कुछ खुलेआम हो रहा है। रात 10 बजे से ही दलालों के गुर्गे काउंटर के बाहर लाइन पर कब्जा जमा लेते हैं। रोज वही चेहरे, वही लोग—लेकिन कार्रवाई शून्य! सुबह काउंटर खुलते ही ये लोग टिकट उठाते हैं और फिर शुरू होता है कालाबाजारी का खेल।
काउंटर पर कब्जा, सिस्टम पर सवाल
स्टेशन के मुख्य द्वार के तीन काउंटर और सेकेंड एंट्री का एक काउंटर—यानी पूरा ‘तत्काल’ सिस्टम दलालों के हवाले! आम यात्री लाइन में लगकर भी खाली हाथ लौटता है, जबकि दलाल मोटी कमाई कर रहे हैं।
रोज लाखों का खेल? किसकी जेब में जा रहा पैसा!
सूत्रों के मुताबिक, राउरकेला समेत पानपोश, कलूंगा और बीरमित्रपुर स्टेशनों पर हर महीने लाखों रुपये की कथित अवैध वसूली हो रही है। यह पैसा किस-किस तक पहुंचता है, यह सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
RPF की भूमिका पर गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल—आखिर RPF कर क्या रही है? आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय RPF दलालों को संरक्षण दे रही है। ‘तत्काल’ के समय काउंटर से गायब रहना और दलालों को खुली छूट देना—क्या यह महज लापरवाही है या सुनियोजित खेल?
क्लर्क भी खेल में शामिल?
काउंटर पर बैठे कुछ कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप हैं। कहा जा रहा है कि दलालों के टिकट निकालने के बदले 500 से 1000 रुपये तक प्रति टिकट वसूले जाते हैं। यानी टिकट नहीं, बल्कि ‘सुविधा शुल्क’ का कारोबार चल रहा है।
रेलवे का ही कर्मचारी बना मास्टरमाइंड?
मामला यहीं नहीं रुकता—बीरमित्रपुर में टिकट कालाबाजारी का कथित मास्टरमाइंड रेलवे के कमर्शियल विभाग का ही एक कर्मचारी बताया जा रहा है। अगर यह सच है, तो यह पूरे सिस्टम के सड़ने का सबसे बड़ा सबूत है।
विजिलेंस भी बेअसर, CCTV भी बेकार!
गार्डन रीच, कोलकाता से विजिलेंस टीम आती है, जांच होती है, लेकिन नतीजा—शून्य! सवाल उठता है कि क्या जांच सिर्फ दिखावा है? जब पूरा खेल CCTV में कैद है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
अधिकारियों का पल्ला झाड़ना जारी
इधर इस मामले में सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने माना कि टिकट दलाल काउंटर में सक्रिय रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा समय समय पर इसकी जानकारी भी आरपीएफ को दी जाती है लेकिन आरपीएफ कोई कार्रवाई नहीं करती है। टिकट दलालों पर शिकंजा कसना आरपीएफ का काम है। हालांकि सीनियर डीसीएम ने विभाग के कर्मियों की संलिप्तता और उनके ऊपर कार्रवाई की बात गोल कर गए। साफ़ है कि काउंटर में टिकट दलाल हावी है, मिलीभगत से गोरख धंधा स्टेशन में चल रहा है। लेकिन कार्रवाई करने की जब बात आती है तो इसकी जिम्मेदारी लेना कोई नहीं चाहता और ना ही कोई इसपर लगाम लगाने के लिए सकारात्मक कदम उठाता है।
यात्री पूछ रहे—आखिर कब टूटेगा दलालों का ‘राज’?
लोगों में गुस्सा है, नाराजगी है और सबसे बड़ा सवाल—क्या रेलवे में आम आदमी की कोई जगह बची है?
जब शीर्ष स्तर पर ईमानदारी की बात होती है, तो जमीनी हकीकत इतनी शर्मनाक क्यों है?





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