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पटरी पर लेट, सड़क पर तेज़: सीनियर रेल अफसर की कार ने मारी टक्कर, हंगामा के बाद 6000 में ‘सेटलमेंट’  

  • Writer: RailMantra Bureau
    RailMantra Bureau
  • Apr 6
  • 2 min read


जमशेदपुर: जो जिम्मेदार रेल अधिकारी पटरी पर समय पर यात्री ट्रेन नहीं चला पा रहे हैं, वो अधिकारी सड़क पर आगे निकलने की होड़ में दुसरे की कार को टक्कर मार रहे हैं. एक तरफ जहां भारतीय रेलवे के तहत आने वाले चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर उसी मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी सड़क पर जल्दबाज़ी में नियम तोड़ते नजर आए। मामला करनडीह का है, जहां सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी की कार ने ओवरटेक करने की होड़ में आगे चल रही कार को जोरदार टक्कर मार दी।


घटना परसुडीह थाना क्षेत्र के करनडीह चौक से करीब 400 मीटर दूर गैंताडीह मेन रोड पर हुई। बताया जा रहा है कि ओड़िशा का एक परिवार अपनी कार से यात्रा कर रहा था। तभी सड़क पर अचानक आए बत्तख को बचाने के लिए उन्होंने ब्रेक लगा दिया। ठीक पीछे चल रही सीनियर डीसीएम की कार समय रहते नहीं रुक सकी और पीछे से टक्कर मार दी, जिससे आगे वाली कार का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।


हादसे के बाद मामला और गरमा गया। ओड़िशा के परिवार ने मौके पर ही कार रोककर हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। पहले तो किसी को यह पता नहीं था कि कार में कोई बड़ा रेल अधिकारी सवार है, लेकिन जैसे ही पहचान सामने आई, मामला और तूल पकड़ने लगा।


आरोप है कि टक्कर के बाद सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने अपना रौब दिखाते हुए तुरंत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) इंस्पेक्टर को फोन कर बुला लिया। कुछ ही देर में आधा दर्जन से अधिक आरपीएफ जवान मौके पर पहुंच गए। हालांकि, इससे माहौल शांत होने के बजाय और गरमा गया, क्योंकि स्थानीय लोग इसे दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे थे।


इधर, ओड़िशा के परिवार ने हर्जाने के तौर पर 15 हजार रुपये की मांग की, लेकिन काफी बहस और तनातनी के बाद मामला 6000 रुपये में ही ‘सेटल’ कर दिया गया। इस बीच झारखंड पुलिस के परसुडीह थाना प्रभारी भी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को थाने ले जाया गया। अंततः वहीं समझौता हुआ और दोनों पक्ष वापस लौट गए।


सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो रेल अधिकारी पटरियों पर ट्रेनों को समय पर नहीं चला पा रहे, रोजाना हजारों यात्रियों को घंटों ट्रेन में लेट करवाने वाले अधिकारी सड़क पर जल्दबाजी के साथ घर पहुंचना चाहते हैं, क्या वे सड़क पर भी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। यह घटना न सिर्फ एक सड़क हादसा है, बल्कि सिस्टम के भीतर अफसरशाही का भी एक नमूना है।

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